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द राजनीतिक तिरंगा ( एक व्यंग्य )

नमस्कार, आप पढ़ रहे हैं राजनीतिक तिरंगा. मैं हूं देशभक्त. स्वागत करता हूं हमारे ख़ास शो आय लव तिरंगामें जहां बात करेंगे.. नीचे पढ़ लो क्या बात करेंगे-

हमें तिरंगा की सम्मान की चिन्ता नहीं हमें तो अपनी सो कॉल्ड राजनीति की चिंता है. समय-समय पर हम किसी ख़ास मक़सद से लव जिहाद, घर वापसी, धर्मांतरण, हर घर 5-10 बच्चे जैसे परियोजना को लेकर आते हैं. उसी के तहत अब तिरंगा मार्च (कथित देशभक्ति) लेकर आए हैं जो पूरे देश में निकलेगा लेकिन निशाना यूपी होगा. भारत माता की जय भी उसी मुहीम का हिस्सा है. जिसमें आप शामिल होकर ख़ुद को देशभक्त होने का निशुल्क सर्टिफ़िकेट प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही सोशल मीडिया के लिए फोटो क्लिक कराकर तिरंगे के नाम पर दबादब लाइक कमेंट्स पा सकते हैं.घर में बैठ कर कैप्शन में चीर देंगे फाड़ देंगे लिख दोगे तो वाहवाही अलग से. कई लोग आपके पोस्ट शेयर कर देंगे तो पार्ट टाइम सेलिब्रिटी की फ़ीलिंग अलग से. खाली बैठे हो तो यहीं कर लो काम अच्छा है कुछ पैसे भी मिल जाएंगे. देश ख़तरें में है तिरंगा भी ख़तरें में है करीब महीने में विलुप्त हो जाएगा अब नहीं तो कब करोगे ?
जो ये कहेंगे और करेंगे वही सही है. ऐसा आप नही करते तो आप देशभक्त नहीं. आपको भारत में रहने का अधिकार नहीं. फिर तो भईया आप वीज़ा बनवाईए और पाकिस्तान के लिए निकल लीजिए. क्योंकि जो इनके बातों से सहमत नहीं वो देशद्रोही है ऐसा इनका कहना है.- विबेक दुबे
भाई बन जाओ न देशभक्त क्या दिक्कत है? वन टाइम इंवेस्टमेंट है सर्टिफ़िकेट भी मिलेगा जिसके कि बाद में आपको पार्टी भक्ति सेनानीका कुछ साल पेंशन भी मिल जाएगा. राशन की दुकान पर सर्टिफ़िकेट दिखाकर 40रु/किलो दाल मिल जाएगा. मॉल में ब्रांडेड कपड़े खरीदने पर 90% देशभक्ति का डिस्काउंट मिल जाएगा.. सौदा सही है कर लो.

हमें ग़रीबी, भ्रष्टाचार, ग़ुलामी, अहिंसा, महिला सुरक्षा और सम्मान, संसद में बैठे 34% आपराधिक सांसदों से आज़ादी नहीं चाहिए. हमें तो सिर्फ़ और सिर्फ़ सत्ता चाहिए और दूसरी राजनीतिक पार्टियों से आज़ादी चाहिए, चाहे इसके लिए साम, दाम, दंड भेद कुछ भी करना पड़े.
हां ये वही तिरंगा है जिसे शान से फ़हराने के लिए करोड़ों लोगों ने बलिदान दिया. हमारे सैनिकों ने कई युद्ध लड़े. लाखों शहीद हुए. ये वही तिरंगा है जिसके नीचे शहीदों के शव को रखा जाता है जिन्हें तिरंगे का कफ़न नसीब होता है. ये सम्मान आम लोगों को नहीं मिलता तो क्या हो गया हमें क्या लेना देना है इससे.. हमें तो बस तिरंगे के नाम पर अपने स्वार्थ की चिंता है.  
सभी को किसी न किसी से आज़ादी चाहिए. हम भी मांग रहे हैं तो क्या ग़लत कर रहे हैं हय ?
केजरीवाल को मोदी से आज़ादी चाहिए मोदी को केजरीवाल से. बीजेपी को कांग्रेस से कांग्रेस को बीजेपी से. मायावती को मुलायम से मुलायम को मायावती से. आज़म ख़ान को अपने भैंस खोने से आज़ादी चाहिए. और योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्राची, असदुद्दीन ओवैसी तो बेचारे प्राचीन काल से ही अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए तरस रहें इन पर तो दया आती है बात करने में, कसम से. - विबेक दुबे

यूपी-बिहार के चुनाव में जातिगत चक्रव्यूह  हमेशा बनता है जो इसे तोड़ पाता है वही मुक़द्दर का सिकंदर बनता है. आपको पता ही होगा कि यूपी में करीब 6 महीने बाद चुनाव होने वाले हैं और हमारे भक्त सोये पड़े हैं. क्या करें वो भी तो थक जाते हैं न. अब उनका फिर से इस्तेमाल करना है तो जोश तो भरना ही होगा और कोई भी ख़ुद को देशभक्त कहलाने में फ़ीलिंग प्राउड तो करेगा ही. इसलिए मिशन तिरंगा मार्च निकाला हमने ताकि उन्हें लगे कि वो पार्टी के लिए नहीं देश के लिए काम कर रहे हैं.

आप जानते ही है कि हमारी पार्टी को हमारे कर्मो के वजह से एक ख़ास धर्म पसंद नही करता. ऊपर से कथित गाय रक्षा के नाम पर बेग़ुनाह दलितों की पिटाई से दलित हमारे ख़िलाफ़ हो गए. हमें समर्थन करने वाले धर्म का भी एक हिस्सा हमें इसलिए पसंद नही करता क्योंकि हम एक धर्म राष्ट्र बनाना चाहते हैं. पता नहीं किसने किताब में फ़ालतू सा लिख दिया कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में सब भाई-भाई हैं और बचपन से इसे लोग पत्थर की लकीर समझ बैठे.

अब तिरंगा मार्च लेकर आए हैं ताकि देशभक्ति के नाम पर सभी जातियों को एक कर वोट पा सके और यूपी में सत्ता की कुर्सी पर बैठ सके. तो हम ग़लत थोड़ी कर रहें, काम छोड़कर आईये शामिल होईये ऑफ़र सीमित समय के लिए है जल्दी करें.. 
ज्ञान: तिरंगा देश में अलग-अलग विचारधारा और धर्म होने पर भी ये सभी धर्मो को  एक राह पर ले जाता है जो हमारे लिए एकता का प्रतीक है. इसमें मौजूद तीन रंग और अशोक चक्र का अपना अर्थ है-
केसरिया रंग जो बलिदान का प्रतीक है राष्ट्र के प्रति हिम्मत और नि:स्वार्थ भावना को दिखाता है.
सफ़ेद रंग  जो राष्ट्र की शांतिशुद्धता और ईमानदारी को प्रदर्शित करता है.
हरा रंग जो विश्वास,  उर्वरताखुशहालीसमृद्धि और प्रगति को दर्शाता है.
अशोक चक्र की सभी 24 तीलियां जीवन को दर्शाती है जो इस प्रकार हैं:
प्रेम, बहादुरी, धैर्य, शांति, उदारता, अच्छाई, भरोसा, सौम्यता, नि:स्वार्थ भाव, आत्म-नियंत्रण, आत्म बलिदान, सच्चाई, नेकी, न्याय, दया, आकर्षणशीलता, नम्रता, हमदर्दी, संवेदना, धार्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्य, धार्मिक समझ, भगवान का डर और उम्मीद.
तिरंगा किसी से बैर नहीं करता किसी से भेदभाव नहीं करता सबका सम्मान करता है. पहले इस तिरंगे को उठाने लायक बनो फिर तिरंगा मार्च निकालो. उस अहसास को महसूस करो जब कारगील में जीत के बाद सैनिको ने तिरंगा फ़हराया था और अब जब 207 देशो के बीच रियो ओलंपिक 2016 में साक्षी, सिंधु ने मेडल जीतने के बाद तिरंगे को उठाया तब उनके चेहरे पर क्या रौनक थी. हमें इस राष्ट्र ध्वज की आन-बान और शान बनाए रखना चाहिए. तिरंगे को राजनीति के रंग में मत रंगो वरना एक दिन ये अपना सम्मान खो देगा. - विबेक दुबे

देशभक्ति की कॉपीराइट के लिए स्पेशल थैंक्स-
नया वाला: यूपी चुनाव में बीजेपी हारी तो यह पाकिस्तान की जीत जैसा होगा संगीत सोम
पुराना वाला: बिहार चुनाव में बीजेपी हार गई तो पाकिस्तान में पटाके फूटेंगे – अमित शाह

अभी के लिए इतना ही अगले चुनाव में फिर मिलेंगे किसी दूसरी परियोजना के साथ. मैं देशभक्त को दीजिए इजाज़त धन्यवाद !
तिरंगे पर पूरी जानकारी के लिए आप राष्ट्रीय ध्वज संहिता यहां पढ़ सकते हैं. 

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