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मेरी ज़िन्दगी हैं तुम्हारी नहीं..

यू तो फ़ेसबुक पर स'लूट करने को कई पोस्ट दिखते हैं। कभी सैनिकों के नाम पर, तो कभी किसानों के नाम पर, तो कभी एक बुढ़ी माँ के नाम पर लाईक और स'लूट की अपील करते पोस्ट नज़र आते हैं। पर इन सब से अलग, कल मेरे मित्र ने एक पोस्ट शेयर किया एसिड से जली एक लड़की की। जिसकी आँखे और नाक पीघल कर एक हो चुके थे। होंठ और कान तो बिल्कुल गायब सा हो गया था। 

Sonali Mukherjee hails from Dhanbad
अब फ़ेसबुक पर मैं क्या सैलूट दूँ ? बस जब भी सोचने बैठता हूँ आँखे नम सी हो जाती हैं और गुस्सा आता हैं उन पर जो एसिड (तेज़ाब) फेंकते हैं| सोचता हूँ कैसे होते होंगे वे लोग ? कैसे दिखते होंगे ? क्या सोचते होंगे ? कैसे होंगे इनके माता-पिता ? कैसे इनके दोस्त होंगे और किस समाज से आते हैं ये लोग ? क्या इन्हे हम बनाते हैं या खुद ऐसा बनते हैं ?
अगर तुम उन में से हो और तुम मेरी बात सुन रहे हो तो सुनो| जो तुम बेगुनाह लड़कियों के शरीर पर एसिड फेंकते हैं क्या तुम्हें मालूम नहीं कि कभी हमारा हाथ रोटी सेंकते हुए थोड़ा सा जल जाता था तो कितना दर्द होता था| जब दीवाली पर पटाखे या दिये से थोड़ा हाथ जलते थे तो कितना गुस्सा आता था या जब कपड़े प्रेस करते वक़्त गर्म प्रेस थोड़ा सा हाथ में टच ( स्पर्श ) क्या होता था मानो पूरा हाथ जल गया हो और मां को जल्दी में कोई दवा नहीं मिलती तो भागकर पेप्सोडेंट, कोलगेट लाती और लेप लगा देती थीं| आज भी जब गर्म चाय पीते हुए कभी हमारे होंठ जलते हैं तो कितना जलन महसूस होता हैं|


जरा सोचो वो एसिड जो हड्डी तक को पीघला देती हैं| जब उस लड़की पर पड़ती होगी और शरीर के चमड़े, आँख, कान पीघल कर वहीं गिर जाता होगा तो कितना दर्द होता होगा ? उगंलिया पीघल कर एक हो जाती हैं। वही गर्दन पर एसिड पड़ने पर आवाज़ ख़त्म हो जाती, तो चेहरे पर पड़ने से आँखों की रोशनी और कान की सुनने की क्षमता ख़त्म हो जाती। इतना दर्द मिलता हैं कि जीने से अच्छा मरना बेहतर लगने लगता।
उन लड़कियों को भी सजने संवरने का शौक होगा| वो भी हंसना चाहती हैं| अपने और अपने मां-बाप के सपने को पूरा करना चाहती हैं| फिर क्यों करते हो नफ़रत इनसे अरे नफ़रत तो तुमसे होना चाहिए, तुम्हारे उस सोच से होना चाहिए क्योंकि तुम उन लोगों में से हो जिन्हे लगता है कि पुरुष का महिलाओं पर जन्मसिद्ध अधिकार हैं|
क्या तुम्हे अंदाजा नहीं था एसिड फेंकने से पहले उस दर्द का ? उसका 1 प्रतिशत दर्द तो तुम्हे जरुर पता होगा क्योंकि कभी तो तुम्हारे शरीर पर गर्म दूध, गर्म चाय या गर्म पानी गिरा होगा कभी तो तुम्हारे हाथ पटाखे से जले होंगे, कैसे तिलमिला गए होगे तुम उस दर्द से| ज़रा सोचो और महसूस करों उस दर्द को जिसका तुमने एक पल में ज़िन्दगी बेरंग कर दी|

फिर भी ये दर्द तो छोटा हैं उनके लिए लेकिन उस दर्द का क्या जो कई लाख ख़र्च करने पर भी ज़िन्दगी भर उसका पीछा नहीं छोड़ती ? कॉलेज, स्कूल सब कुछ छूट जाता हैं| दोस्त उनसे दूर होने लगते हैं| दूर के रिश्तेदार लड़की पर ही उंगली उठाते और रिश्ता तोड़ लेते हैं| लोगों का घर पर आना-जाना बन्द हो जाता हैं| दु:ख की सीमा उस वक़्त और चरम पर हो जाती जब कभी-कभी अपने परिवार वाले ही उस एसिड अटैक सर्वाइवर से कटे-कटे रहने लगते हैं|
NCRB के अनुसार 2014 में 309 एसिड अटैक केस सामने आए थे और ज़्यादातर मामलें में अटैक का कारण एकतरफा प्यार, शादी से इंकार, रेप का विरोध करना था।
आख़िर क्या गलती होगी उन लड़कियों की ? यही न कि उसने तुम्हारे कथा कथित प्यार को इंकार किया, या वो सिर्फ़ दोस्त बनना चाहती थीं | अरे इंकार तो तुम्हारे माँ -बाप भी किये होंगे ,कई बार किये होंगे तो क्या तुम उन पर भी एसिड डालते? अच्छा चलों मान लिया कि तुम उस लड़की से बहुत प्यार करते थे, तो अगर तुम्हारे एसिड फेंकने के बाद अपना जला हुआ चेहरा लेकर वो लड़की तुम्हारे पास आये और बोले कि मैं तुम्हारा प्रपोज़ल स्वीकार करती हूँ, तो तुम तो उसें स्वीकार कर लोगे न ? क्या ? नहीं करोगे? पर क्यों नहीं ?
मैंने तो सुना था कि सच्चा प्यार सुख दुख में साथ होता हैं| अच्छा तो तुम उस लड़की के अन्दर उस खूबसूरत "दिल" से प्यार नहीं करते थे बल्कि बाहर से दिखने वाले लड़की के “शरीर” से प्यार करते थे और उसे पाना चाहते थे जैसे वो कोई प्रोडक्ट हो| लड़की ना कहें तो जला दो काट दो| जैसे लड़की को अपने फ़ैसले लेने का अधिकार ना हो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी मर्ज़ी हो.. क्यों ?
या शायद तुम्हें अपनी गलती तब महसूस होगी जब भविष्य में तुम जैसा ही सरफ़िरा आशिक़ तुम्हारे बेटी के पीछे पड़ जाए पर तब शायद देर हो चुकी होगी...

नोट: फोटो के लिए “स्टॉप एसिड अटैक” का शुक्रिया| अगर आप इस संस्था को कुछ मदद करना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाए|

मेरा यह पहला ब्लॉग हैं कैसा लगा आपको जरुर बताए|


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